खुद से एक मुलाकात – डायरी✍️( भाग 14)
डायरी-खुद से एक मुलाकात
30/12/2021- यादे कुछ अनकही सी।
दिन – गुरुवार
जनवरी से लेकर दिसम्बर तक की डायरी अलग अलग पन्नो मे लीख दी है। अब यादे कुछ अनकही सी के बारे मे और क्या लीखे।
कुछ खट्टी-मीठी यादे जरुर है 2021 की। सब से पहेले एक अनजान शहर मे सेट होना था, साल के आखरी दिन तक आखिर मे हो ही गया। मेरे दो साथियो के यहा बच्चो का जन्म हुवा वो भी एक सुनहरी यादो मे शामिल है। पुरे भुज का दौरा दिवाली के त्योहारो मे कीया जो बहुत सालो के बाद फेमीली के साथ घुमने का मौका मीला वो अविस्मरणिय यादो मे शामिल है।
एक बार फिर मरते मरते बचा, ये भी सुनहरी यादो मे शामिल है। पिछले कुछ सालो से न मै लीख पाता था, मतलब मेरे सारे शौख धीरे धीरे छुट रहे थे और मै देखता था की शायद अब कभी मुज से न होगा। लेकिन मैने पहेले भी लीखी था न की जहा उपरवाले की चलती है वहा अपनी नही चलती। एक बार और मौका मीला तो सबकुछ फिर से नये तरीके से शुरु हो गया। लेखनी परिवार की और से एक अनमोल भेट भी मुजे मीली।
इन्सान अपने जीवन मे पाता रह्ता है और खोता रहता है। जब हमे ये लगता है की अब खोने को कुछ न बचा तभी जो जटॅका लगता है फिर याद आता है ये भी छिन गया और जब मिलता है तब भी आश्चर्य होता है की ये तो सोचा ही न था की ये मिलेगा भी या नही।
जीवन एक इम्तिहान है और जो डर गया वो कभी जीत नही पाता और जिस ने संघर्ष शुरु रखा वो कभी न कभी जरुर जितता है।
अंत मे इतना ही कहुंगा एक मशहुर गाने के साथ...'आदमी मुसाफिर है..आता है जाता है...आते जाते रस्ते मे यादे छोड जाता है...' ये यादो का सिलसिला हमे हमेशा याद रह्ता है। इसी का नाम शायद जिन्दगी है।
आज बस इतना ही....बाकी बाते अगले पन्नो मे।
PHOENIX
01-Jan-2022 05:38 PM
धन्यवाद एंजल जी ।
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🤫
01-Jan-2022 04:32 PM
बेहतरीन डायरी लेखन है आपका...
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